शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने बनेंगे उत्कृष्ट विद्यालय

राज्य सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने उत्कृष्ट विद्यालयों की स्थापना करने की योजना बनाई है। इसी योजना के संदर्भ में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने दुर्ग और राजनांदगांव शहर के विभिन्न स्कूलों का भ्रमण कर जायजा लिया। इन दोनों जिलों के नगरीय निकायों के आगामी शिक्षा सत्र की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संबंधित जिलों के कलेक्टर, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय श्री जितेन्द्र शुक्ला, रायपुर और दुर्ग संभाग के प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, महापौर राजनांदगांव की हेमा देशमुख, विधायक एवं महापौर दुर्ग देवेन्द्र यादव, संबंधित जिलों के पार्षद और जनप्रतिनिधियों के साथ शासन की योजनाओं के संबंध में चर्चा की।


प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. शुक्ला ने चर्चा में कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए बेहतर पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था करना चाहती है। बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करेंगे तो जीवन में आगे बढ़ेंगे। शिक्षा की गुणवश्रा में सुधार लाना ही राज्य सरकार का मूल उद्देश्य है। स्कूलों में पढऩे-लिखने का अच्छा माहौल तैयार करना, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल सामग्री और हर विषय के प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था करना जरूरी है।

प्रदेश सरकार बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उत्कृष्ट स्कूलों की स्थापना करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के माध्यम से ज्यादा महत्वपूर्ण गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई है।


डॉ. शुक्ला ने राजनांदगांव में स्थानीय सर्वेश्वर दास नगर पालिक निगम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का जायजा लिया। उन्होंने दोनों स्कूलों के प्राचार्यों के साथ-साथ शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों से चर्चा कर इस संबंध में कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।


डॉ. शुक्ला ने दुर्ग जिले की समीक्षा बैठके में बताया कि राज्य गठन के समय उनका बेटा कक्षा छठवीं में पड़ता था और पढ़ाई की पुस्तकों में उसका मन कम लगता था। एक दिन उसे हैरी पॉटर की पुस्तक लाकर दी, उसके बाद उसे पढऩे का शौक लगा फिर उसने खूब पढ़ाई की। उन्होंने कहा की इसी तरह समृद्ध पुस्तकालय बच्चों की पढ़ाई की दिशा को काफी हद तक तैयार करता है। पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के साथ मुंशी प्रेमचंद की किताबें भी हो, ताकि बच्चों में संवेदनशीलता भी आए और साहित्य से आने वाली समृद्धि उन तक पहुंचे। अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं प्रारंभ करने के साथ ही बच्चों को अंग्रेजी सीखाने के लिए साहित्यिक किताबें अहम हो सके। बच्चों के रूचि के अनुरूप पुस्तके होने पर उनमें पढऩे का शौक बनेगा और उनका भविष्य गढ़ेगा।

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