रोजगार रूट दे रहा हजारों को रोजगार

गांव में रहने वाली महिलाएं जो समाजिक आर्थिक रूप से पीछड़ेपन का दंश झेलते हुए, अपने परिवार के साथ मासूम बच्चों के पढाई सहित अन्य जरूरतों की पूर्ति करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसी सैकड़ों महिलाओं के लिए सशक्त सहारा कहें या अवसर जिलें के कलेक्टर ने सुराजी सूरजपुर पहल के अंतर्गत रोजगार रूट  संचालन के लिए विविध उत्पादों का निर्माण व विक्रय के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए महिला ग्राम संगठन के रूप में कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उपरांत अवसरों को उपलब्ध कराने सें आज के समय मे एक सफल व्यवसायी उपक्रम को संचालित करनें वाले सदस्य के रूप में अपनी पहचान के साथ आर्थिक विकास के राहो पर सफलता की इबारत दर्ज करा रही है।

 यह रोजगार रूट वर्तमान में जिलें के 17 ग्राम पंचायतों  में मषरूम उत्पादन, अचार, पापड़ निर्माण, हस्तनिर्मित साबुन, हर्बल निमाईल, गोबर के गमले, दिया एवं मूर्ती निर्माण, चेन लिंक फेंसिग, आर.सी.सी. पोल निर्माण, पेवर ब्लाक निर्माण, सेंट्रिंग प्लेट, वर्मीकम्पोस्ट, मूंगफली की चिक्की निर्माण, अगरबत्ती, सिलाई-कढ़ाई, मोरिंगा पावउर एवं बेकरी उत्पाद, बोट परिचालन, ई-रिक्षा परिचालन, मुर्गीपालन, डेयरी उत्पाद एवं प्रिटिंग प्रेस जैसी गतिविधियों को संचालित करने के लिए अलग अलग 18 ग्राम संगठनों के 3030 महिलाएं लाभांन्वित हो रही हैं। इसमें सबसे अहम  525 ऐसी महिलाएं है । इन्हीं में शामिल जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित ग्राम तिलसीवा में प्रगति महिला ग्राम संगठन द्वारा मशरूम उत्पादन कर रही है।इस संगठन की शुरुआत विगत 06 अक्टूबर सें 08 अक्टुबर तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण देकर शुरुआत किया गया।


इस ग्राम संगठन 17 ऐसी महिलाएं है, जो विधवा, परित्यक्ता एवं बेहद गरीब परिवार की सदस्य हैं, इन्हें महिला संगठन में सदस्य के रूप में जोडक़र रोजगार प्रदान किया गया है ।इस संगठन के सदस्यों में शामिल महिलाएं मशरूम उत्पादन के साथ  नरवा, गरूवा, घुरूआ और बाड़ी योजना के अंतर्गत बाड़ी विकास के तहत अपनें खेतों में वर्तमान समय में आलु, प्याज, मटर के साथ अन्य सब्जियों का भी उत्पादन कर अतरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इस संगठन की सदस्य 26 वर्षीय श्रीमती अजयकुमारी पति राजेंद्र सिंह जो तिलसीवा के गोंडपारा बस्ती की रहने वाली है, उन्होंने बताया कि उनके पति राजेंद्र सिंह द्वारा महिने में कभी कभार मजदूरी का अवसर मिलने पर किसी तरह से परिवार का जीवन यापन करने में अभाव के बीच गुजर रही थी, इसी दरम्यान गांव में एनआरएलएम के माध्यम से महिला ग्राम संगठन गठन की जानकारी मिलने पर सदस्य के रूप में जुड़ी और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने घर पर ही मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया जो बीते पांच माह के अंतराल में करीब 85 किलो मशरूम उत्पादन हुआ और इसकी बिक्री करीब 200 रूपये प्रति किलोग्राम अनुसार करनें सें हासिल हुई आमदनी नें जीवन में बदलाव के लिए सशक्त माध्यम और आशा मिली है। इससे होने वाली आमदनी सें अपनी बड़ी पुत्री जो पांच वर्ष की होने वाली है, उसकी अच्छी परवरिश के साथ शिक्षित करने के लिए अब किसी तरह से परेशानी उनके सामने नहीं है।

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