देश में नई शिक्षा नीति लागू करने पर 25 राज्य हुए सहमत…होंगे कई बदलाव

देशभर में पुरानी शिक्षा नीति में कुछ परिवर्तन करने पूरे देशभर के राज्यों ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जता दी है। लिहाजा, अब माना जा रहा है कि देश में नई शिक्षा नीति लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा। 


आपको बता दें कि पश्मिच बंगाल समेत जो राज्य स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्य, सिद्धांतों को शामिल करने का विरोध कर रहे थे, वे सब अब मोदी सरकार के साथ समर्थन में हैं। मोदी सरकार को नई शिक्षा नीति के ड्रॉफ्ट को लागू करने के लिए 25 राज्यों का साथ मिल गया है। 


बताया जा रहा है कि राज्यों ने बैठक में स्कूली पाठ्यक्रम में मानवीय मूल्य, भारतीय संस्कृति, सिद्धांतों को खुद शामिल करने की मांग रखी है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों के सुझावों के तहत नई शिक्षा नीति में खास बात यह है कि राज्यों का मानना है कि दुनिया में भारतीय शिक्षा का परचम लहराने के लिए विदेशी फैकल्टी और छात्रों को जोडऩे की सरकार की पहल सराहनीय है। 


नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के सचिवों ने नई शिक्षा नीति के तहत नई योजनाओं व रिसर्च को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से विशेष पैकेज मांगा है। उनका कहना है कि शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने समेत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उन्हें ओर पैसे की जरूरत है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों(हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) ने भी शिक्षा के लिए ओर अधिक बजट देने की मांग रखी है। 


वैसे देखा जाए तो यदि देश में नई शिक्षा नीति लागू होती है तो इससे छात्र-छात्राओं को और भी नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही विदेशों में जो शिक्षा पद्धति लागू है, उसका विश्लेषण और अध्ययन करने का अवसर भारतीय मूल के छात्रों को मिल सकेगा। इसके अलावा नए शिक्षा नीति में भारतीय परंपराओं को स्थान मिलने से यहां के संस्कृति और कला से विदेशी भी अवगत होंगे। इसके अलावा भारत के अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को दूसरे राज्य के बारे में जानने का अवसर भी प्राप्त होगा। वहीं नई शिक्षा नीति में रोजगार परक शिक्षा को यदि शामिल किया जाएगा, तो रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और बेरोजगारी पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा।

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