छात्र-छात्राओं की इंजीनियरिंग में घट रही रुचि…36 कॉलेजों में एक भी एडमिशन नहीं…

ऐसा लगता है कि बढ़ती बेरोजगारी और कॉलेजों के लगातार बढ़ते भारी-भरकम फीस के चलते छात्र-छात्राओं का रुझान इंजीनियरिंग कोर्स की ओर तेजी से घटने लगा है। वैसे इंजीनियर और डॉक्टर बनने का सपना हर युवा का होता है, लेकिन इंजीनियरिंग जैसे कोर्स में लगातार घट रही छात्र-छात्राओं की संख्या निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। युवा इंजीनियर की पढ़ाई की ओर ना मुडक़र ऐसे कोर्स की तलाश में हैं, जिसकी नौकरी की गारंटी हो।

मीडिया में आ रही खबरों की मानें तो उत्तरप्रदेश जैसे राज्य में इंजीनियरिंग में प्रवेश को लेकर छात्र-छात्राओं ने बिल्कुल भी रुचि नहीं दिखाई है। खबरों में बताया जा रहा है कि स्टूडेंट्स के रुचि नहीं लेने की वजह से ही 36 से ज्यादा कॉलेजों में इस वर्ष एक भी एडमिशन नहीं हो पाया है। यदि ऐसा है तो निश्चित ही ये चिंतनीय विषय है।

वहीं यहां इंजीनियरिंग, ऑर्कीटेक्चर व फॉर्मेसी क्षेत्र में उच्च शिक्षा (परास्नातक) की पढ़ाई संकट में आ गई है। बताया जा रहा है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) द्वारा अपने घटक संस्थानों व संबद्ध कॉलेजों में एमटेक, एमआर्क, एमडेस में प्रवेश के लिए तीन चरणों की काउंसलिंग में 500 सीटों के सापेक्ष मात्र 270 प्रवेश हुए हैं। 

काउंसलिंग में एमटेक में 5 सरकारी संस्थानों के साथ 85 कॉलेजों में, एमफार्मा में 39 कॉलेजों, एमआर्क में 1 व एमडेश के लिए 1 संस्थान शामिल हैं। सरकारी संस्थान सेंटर फॉर एडवांस स्टडीज (कैस), आईईटी लखनऊ, केएनआईटी सुल्तानपुर, बीआईईटी झांसी, यूपीटीटीआई कानपुर, फैकल्टी ऑफ ऑर्कीटेक्चर, यूपीआईडी नोएडा में अभी आधी सीटों पर ही प्रवेश हुए हैं।

कैस में 21, आईईटी लखनऊ में 74, केएनआईटी में 18, बीआईईटी में 21, फेकेल्टी ऑफ ऑर्कीटेक्चर में 11, यूपीटीटीआई में मात्र 4 प्रवेश हुए हैं। 

वहीं एकेटीयू प्रशासन की उम्मीदें आईआईटी-एनआईटी में प्रवेश की काउंसलिंग पर है। विश्वविद्यालय ने प्रवेश के लिए 25 जुलाई को खत्म हो रहे स्पॉट राउंड के बाद 27, 28, 29 व 30 जुलाई को सरकारी व निजी संस्थानों की खाली सीटों के लिए चौथी बार काउंसलिंग का निर्णय लिया है। 

कॉलेजों में एडमिशन नहीं होने को लेकर विशेषज्ञ भी काफी चिंतित है। वहीं बताया जा रहा है कि इंजीनियरिंग की पुरानी ब्रांचों में कोई खास स्कोप न होना भी इसका बड़ा कारण है।

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