इंजीनियरिंग में परंपरागत कोर्स रिडिजाइन किए जाएंगे…

इंजीनियरिंग में लगातार घट रही युवाओं की रुचि वाकई परेशानी का सबब है। एक समय वो था जब युवा इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने एड़ी-चोटी का जोर लगा देते थे। वहीं आज एक दौर ऐसा भी आया है, जब इंजीनियंिरग कॉलेजों में लगातार विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। वहीं पिछले हफ्ते ही खबर आई थी कि अकेले उत्तरप्रदेश के 36 इंजीनियरिंग कॉलेज ऐसे रहे, जहां इस साल एक भी एडमिशन नहीं हो पाया है।

ये तो चिंता की बात नहीं तो और क्या…सरकार ने वर्किंग ग्रूप भी गठित किया है, जो कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग कोर्स को नए सिरे से तैयार करेगा।


वहीं बताया जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में अभी भी कई कोर्स परंपरागत तरीके से ही चलाया जा रहा है। जिसके चलते युवा इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकार इंजीनियरिंग कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट 52 से बढ़ाकर सौ फीसदी करने के लिए परंपरागत कोर्स को रिडिजाइन करने की तैयारी में है। 
बताया जा रहा है कि इसके लिए सरकार ने वर्किंग ग्रूप भी गठित किया है, जो कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक, केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग कोर्स को नए सिरे से तैयार करेगा। 


इतना ही नहीं इस ग्रूप में एपल, गूगल, एसोचैम, नैसकॉम, आईआईटी के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। और कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग में रोजगार बढ़ाने को अखिल भारतीय तकनीकी परिषद और आईआईटी ने पाठ्यक्रम, ट्रेनिंग समेत मार्केट डिमांड के आधार पर कोर्स को डिजाइन किया जा रहा है।


वहीं आपको बता दें कि आईआईटी की कमेटी ने 2017 में केंद्र सरकार को परंपरागत रोजगार मुहैया न करने वाले कोर्स को खत्म करने का सुझाव भी दिया था। साथ इन कोर्स की सीट अन्य कोर्स में शिफ्ट करने की सिफारिश की थी। इसी के चलते इंजीनियरिंग कॉलेजों में ऐसे कोर्स में सीटों में कटौती भी की गई है।
बताया जा रहा है कि रिडिजाइन कोर्स के साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट, क्लाउंड कंप्यूटिंग, एंबोडिड एसडब्ल्यू, डाटा एनालिस्ट, रोबोटिक साइंस, मार्केटिंग, मोबोलिटी जैसे कोर एरिया भी जोड़े जाएंगे।

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